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Friday, January 22, 2016

0 महकते है किताबों में अभी तक खत पुराने से

- आने :          
र  -  से
ब  -  1222  1222   1222   1222.

महकते है किताबों में अभी तक खत पुराने से  
नई दुनिया बसाने के करिश्में भी सुहाने से I
*
चिरागों को जलाए रख सदा तू बुझ नहीं पाये 
यहाँ कब तीरगी से बच सका कोई जमाने से I 
*
गुजर जाएं हजारों मुश्किलों से हम तो' क्या कहने
हमारा नाम आयेगा मुहब्बत के तराने से I
रजामंदी सहारा है हमारा जी मुहब्बत में  
बताओ ना भला वो बाज आये क्यों जमाने से I 
*
मनाना ही फसाना है जरा सोचो मुहब्बत में 
न हम मनते,  न हम फसते, पुराने जेलखाने से I

               -    प्रकाश पटवर्धन, 
4/  

0 लूट सारे ले गये वो अब शिकायत क्या करुं

का-अत  र-क्या करुं   ब- 2122 x 3 + 212.
*
लूट सारे ले गये वो अब शिकायत क्या करुं 
बंदगी लेकर भला मैं अब बगावत क्या करुं I 

राजकाजी बन चले हैं आज सारे चोर ही
साथ उनका देने' की मैं भी हिमाकत क्या करुं I 

रह गया है दूर देखो पासबाने मुल्क भी  
साथ उन के देश को लुटने की जुर्रत क्या करुं I

बदनसीबी हैं हमारी गैर के हाथों गये
हुक्मरानों की बदलती है नियामत क्या करुं I 

चाहतों या ख्वाहिशों की बात कोई क्या करे
तीरगी में साथ लेके ये कयामत क्या करुI

            -    प्रकाश पटवर्धन,
                 विश्रांतवाडी, पुणे.  

0 नया युग हम बनाना चाहते है

का - आना;   र - चाहते है  
बहर -1222 1222   122
**
नया युग हम बनाना चाहते है  
पुराने को भुनाना चाहते है I
*
सभी को साथ लाना चाहते है
नई दुनिया सजाना चाहते है I  
*
कठिन राहे अगर मंझिल तलक हो
वहीं पे आशियाना चाहते है I  
*
चलो अब आजमाये खुदी को   
दिवाने दिल जलाना चाहते है I 
*
धरा सुजला सुहानी हो तभी तो
पुरी ताकद लगाना चाहते है I 

    -    प्रकाश पटवर्धन,